Thursday, February 19, 2009

escape

राजदारों से बच के चलता हूँ, 
ग़म गुस्सारों से बच के चलता हूँ,
मुझ को धोखा दिया सहारों ने,
अब सहारों से बच के चलता हूँ|

Wednesday, February 11, 2009

conflict of heart and experience

My heart says people are good inherently but experience says otherwise.

Monday, February 2, 2009

"The forsaken state"

When you support, feel and live an "idea" (includes being or nonbeing). You defend that "idea" in front of this whole world. Even you can die for that "idea".  But then..... one day when that idea itself lurches you down....,"you are really forsaken"........ 

"A forsaken soul"

Friday, January 30, 2009

तुम बस तुम

बंद आँखें, रुकी साँसे, धड़कनों में तुम,
तुम से दूर क्या रहूँ, ऐ हुज़ूर क्या करुँ?
नज़र आते हो, बस तुम ही तुम||

तुम बस तुम, तुम बस तुम, तुम बस तुम|
नज़र आते हो, बस तुम्ही तुम|

खुली जुल्फें, झुकी पलकें,और चाहतों में तुम,
तुमको भूल ना सकूँ, ऐ हुज़ूर क्या करुँ?
नज़र आते हो, बस तुम ही तुम||

तुम बस तुम, तुम बस तुम, तुम बस तुम|
नज़र आते हो, बस तुम्ही तुम|

एक सपना निगाहों में, ख्वाहीशों में तुम,
ख्वाहीशों में तुम, बस तुम ही तुम|

तुम बस तुम, तुम बस तुम, तुम बस तुम|
नज़र आते हो, बस तुम्ही तुम|

Sunday, January 25, 2009

ख़ुदा से इश्क

इश्क करने में तो वहदत का मज़ा मिलता है,
इश्क सच्चा हो तो बन्दे को ख़ुदा मिलता है|

इश्क करने का मज़ा हमने तो देख लिया,
जिस जगह सजदा किया तुझको वहीँ देख लिया|

इश्क में बू-ऐ-किब्रियाई की,
इश्क जिसने किया खुदाई की|

इश्क शाहों से ना छूटा, ना गदा से छूटा,
हमसे क्या छूटेगा, जब ये ख़ुदा से ना छूटा|

जिसको देखो वो, नज़र आता है दीवाना तेरा|
और वाह क्या अंदाज़ है, ए पीर-ऐ-मयखाना तेरा|

ये भी एक एजाज़ है, ए पीर-ऐ-मयखाना तेरा,
और बज्म में बेपाँव के, चलता है पैमाना तेरा|

दैर में ढूंढा, ना पाया, और ना काबे में मिला,
अरे ठोकरें खिलवा रहा, है कहाँ तू ए ख़ुदा|

दिल भी हाज़िर जां भी हाज़िर, सर भी हाज़िर है तेरे,
और इस से बढ़ कर तू बता दे, क्या है नज़राना तेरा|

तेरे हरजाई पने की हर जगह पे धूम है.
ए सनम, मेरे सनम, ए सनम,
मुश्किल से मुश्किल है पता पाना तेरा|

Saturday, January 24, 2009

हुसैन फ़कीर : रहिये वो नाल सजण दे रहिये वो

तू ही ताणा, तू ही बाणा,
कहे हुसैन फ़कीर ने माणा|
मैं नहीं, (सदर) सब तू|
रहिये वो नाल सजण दे रहिये वो,
लख लख वधियाँ दस्सा ताणे,
सब्बो सिर ते सहिये वो|
रहिये वो नाल सजण दे रहिये वो|
चंदन रुख लगा विच वेड़े,
ज़ोर तिहाडे खैय्ये वो|
रहिये वो नाल सजण दे रहिये वो|
तोड़े सिर बन्जे तड़ नालों,
ता विं हाल ना कहिये वो|
रहिये वो नाल सजण दे रहिये वो|
कहे हुसैन फ़कीर साईं दा,
जीव ते अमर रहिये वो|
रहिये वो नाल सजण दे रहिये वो|

Thursday, January 22, 2009

सब गन्दा है पर धंधा है यह from Movie Company

वोट में नोट, धोती पे है खोट, दिल पे चोट 
मतलब के यार, आगे से प्यार, पीछे से वार
 
सब गन्दा है पर धंधा है यह|

चंदन सा बदन, चंचल चितवन, यारों से जलन, 

हड्डी पसली एक, सीधा साधा पेट, दोनों घुटने टेक 
बातों की धार, हाथों में तार, एक और दो चार 
सब गन्दा है, पर धंधा है यह|

बदले की मिठास, गुस्से का गिलास, कुँए जैसी प्यास  
सब गन्दा है पर धंधा है यह|